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संन्यास लेने की क्या प्रक्रिया होती है? कोई भी गृहस्थ कैसे सन्यासी हो सकता है?

 सन्यासी होने का मतलब संसार का त्याग नहीं इसका मतलब मन से सन्यासी होना | मन को काम वासनाओं से रोकना | गृहस्थी में तो बहुत आसानी से सन्यासी हो सकते हो जितने बच्चे हो गए उसके बाद सम्भोग बंद कर दे | पति व पत्नी को ब्रह्मचर्य का व्रत लेना है मन के संस्यास के लिए

संसार में रहते हुए भी यदि अपने सख्ती से ब्रह्मचर्य का पालन किया तो आप मन से सन्यासी हो जाओगे |

महाऋषि दयानन्द जी के अनुसार

जिस पुरष को विषयसक्ति की इच्छा नहीं , इन्द्रिय भोगेच्छा नहीं , उसे नया सन्यास लेने की कोई आवश्यकता नहीं वह तो पहले से ही सन्यासी है |

यदि वह मन से संस्यासी हो गया है तो उसके लाभ भी सुन ले

जो मन से सन्यासी हो गया उसे ऐसा आनंद मिलता है जो उसे संसार में भोग से नहीं प्राप्त हुआ व उसे इंतना कुछ मिलता है जो कचन व कामनी के पीछे भागने से नहीं प्राप्त होता

एक कहानी सुनिए

एक बादशाह का निजी नौकर था बादशाह की सेवा की ३० साल क्योकि बच्चे पलने थे पत्नी का विषय सुख लेने की कामना थी , पर वह बादशाह उसे आज भी गाली देकर पुकारता है , उस नौकर के मन को देस पहुंची व वहा से घर गया, घरवाली भी उसे गाली दे बच्चे भी आँख दिखाए , मन में हुयी इस चोट से वैराग्य हो गया संसार से

चला गया जंगल बिना कुछ खाये करने लगा परमात्मा को याद

एक दिन बिता , ५ दिन बीते १० दिन बीते बादशाह को नौकर की याद सताने लगी के सारा कार्य करता था , पत्नी व बच्चों को भी अपना स्वार्थ पूरा करना था तो उसकी याद आयी ,

ढूंढ़ने लगे , कहि पता नहीं सब दिशाओं को खोजा

अंत में बादशाह खुद हाथी पर बैठ कर खोजने निकला , बीवी व बच्चे भी खोजने निकले

जब मिला तो किसी जंगल में आंखे बंद कए भगवान की भगति कर रहा था

बादशाह ने कहा १० दिन से आप को मैं ढूढ रहा हु , घरवाली व बच्चों ने कहा कि हम भी १० दिन से आप को ढूढ रहे है

मन से बने सन्यासी ने कहा मैं भी ३० साल से अपनी मन की ख़ुशी व शांति खोज रहा था

कभी बादशाह की नौकरी में , कभी पत्नी के साथ सम्भोग में, कभी बच्चो के मोह में

पर मुझे सिर्फ गालिया व दुःख ही मिला, सो मैं अभी १० दिन उस परमात्मा को अपने दिल से याद किया व मुझे परम् शांति व मन के सुख का अहसास हुआ है जो ३० साल में नहीं हुआ था सबसे बड़ा चमत्कार तो यह है

कि परमत्मा को याद करने से एक नौकर को ढूढ़ने बादशाह भी मेरे पास चल कर आ गया व मुझे जो गाली देता था व आप कहने लगा क्या यह परमत्मा को याद करने का चमत्कार कम है

जिस पत्नी व बच्चो का चमचा बनके मैं दिन रात ३० साल घूमता था आज वो मुझे ढूढ रहे है क्या यह परमत्मा को याद करने का चमत्कार कम है

अगर मैंने ३० साल परमात्मा को याद किया होता जो बादशाहों का बादशाह है , मन की सब कामनाओं को पूर्ण करने वाला सर्वशक्तिमान व सर्वव्यापक है तो आज मेरी स्थिति में कितना सुधार हो जाता, मुझे संसार को त्यागने की भी जरूरत नहीं थी सिर्फ अपने मन को २४ घंटे उसकी याद में बिताना था

चलो जब जागो तब सवेरा

आज से मैंने मन से सन्यास ले लिया है व अब मेरा जीवन उस परमात्मा की याद में ही हमेशा गुजरेगा

यदि आप भी मन के सन्यास का लाभ उठाना चाहते हो तो आज से संकल्प करो के हम ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करेंगे

ब्रह्मचर्य के १०० लाभ" के भाग 19 को पूरा पड़े

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