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ब्रह्मचर्य के १०० लाभ" का भाग 19

  

"ब्रह्मचर्य के १०० लाभ" के भाग 18   में आप का स्वागत है।  भाग १भाग २, भाग ३, भाग ४भाग ५ , भाग 6 और भाग 7  va  भाग 8  भाग ९ व भाग १० व  भाग ११  भाग १२     भाग 13  ,   भाग 14   व भाग 15  व भाग 16   व भाग 17  भाग 18 पढ़ें।

ब्रह्मचर्य का ९१वा लाभ - महामूर्खता से बचना 

ब्रह्मचर्य पालन करने से हम वीर्य के नाश से बचते है वीर्य नाश करना ही सबसे बड़ी महामूर्खता है 

तथा महामूर्ख इसे कुतर्क से ठीक साबित करने की भी मूर्खतापूर्ण कोशिश करता है 

महामूर्ख पति 

मैंने विवाह किस लिए किया , मैं अपनी पत्नी का पालनपोषण भी इस लिए कर रहा हु के उसके साथ भोग करके आनंद प्राप्त कर सकू  पर मुझे और बच्चों की अभिलाषा नहीं है 

गुरु :

 अरे महामूर्ख पति , अमूल्य वीर्य खर्च क्षणिक सुख के अपनी व अपनी धर्म पत्नी की सेहत के साथ खेलना क्या आनेवाले समय में महा दुःख का कारन नहीं बनेगा 

पति का धर्म ब्रह्मचर्य से प्राप्त वीर्य से सिर्फ सूर्य या उषा जैसे संतान पैदा करके जीवन भर के लिए ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है, ताकि जीवन में कहि भी महामूर्खता न करे व बुद्धि बल बड़ा कर शारीरक,मानसकि व समाजिक उन्नति करे | 

वीर्यनाश से पुरष की इन्द्रिय दुर्बल हो जाती है 

स्त्री के रज का नाश होने से स्त्री की इन्द्रिय भी दुर्बल हो जाती है 

 इन्द्रिय दुर्बल होने से आलस बढ़ जाता है 

जिससे शारीरक कार्य करने में आप असमर्थ हो जाते हो 

शारीरक कार्य करने में असमर्थ होने से शरीर कमजोर होने लग जाता है 

कमजोर शरीर को रोग घेर लेते है 

वो रोग इस भय व चिंता शुरू हो जाती है, रातों की नींद उड़ जाती है 

व सिर्फ दुर्ख़ ही दुःख प्राप्त होता है क्योकि खोया है अपने अमूल्य वीर्य यह है आप की महामूर्खता 

यदि ब्रह्मचर्य का पालन करते तो यह महामूर्खता न होती 

चाहे धर्म पत्नी से व्यभिचार हो या रंडीबाजी के दुवारा व्यभिचार हो , यह सब अधर्म है व इस अधर्म का फल ही आपको मिलने वाला दुःख है | 

कई महामूर्ख लोग धन की शक्ति का दुरूपयोग करके वेश्यागमन करते है जिस से उनके वीर्य का नाश होता है व फिर उससे बिरमारियों से लड़ने की शक्ति ख़तम हो जाती है 

यदि आपके पास धन आया है तो इस से फल खाये दूध पिए, कुछ परोपकार के कार्यों में खरच करे जिस से आप को शारीरक शांति प्राप्ति होगी, जीवन हर समय प्रसन रहेगा | 

ब्रह्मचर्य का ९२वा लाभ - मन से सन्यासी होना 

संसार में रहते हुए भी यदि अपने सख्ती से ब्रह्मचर्य का पालन किया तो आप मन से सन्यासी हो जाओगे | 

महाऋषि दयानन्द जी के  अनुसार 

जिस पुरष को विषयसक्ति की इच्छा नहीं , इन्द्रिय भोगेच्छा नहीं , उसे नया सन्यास लेने की कोई आवश्यकता नहीं वह तो पहले से ही सन्यासी है | 

यदि वह मन से संस्यासी हो गया है तो उसके लाभ भी सुन ले 

जो मन से सन्यासी हो गया उसे ऐसा आनंद मिलता है जो उसे संसार में भोग से नहीं प्राप्त हुआ व उसे इंतना कुछ मिलता है जो कचन व कामनी के पीछे भागने से नहीं प्राप्त होता 

एक कहानी सुनिए 

एक बादशाह का निजी नौकर था बादशाह की सेवा की ३० साल क्योकि बच्चे पलने थे पत्नी का विषय सुख लेने की कामना थी , पर वह बादशाह उसे आज भी गाली देकर पुकारता है , उस नौकर के मन को देस पहुंची व वहा से घर गया, घरवाली भी उसे गाली दे बच्चे भी आँख दिखाए ,  मन में हुयी इस चोट से वैराग्य हो गया संसार से 

चला गया जंगल बिना कुछ खाये करने लगा परमात्मा को याद 

एक दिन बिता , ५ दिन बीते १० दिन बीते बादशाह को नौकर की याद सताने लगी के सारा कार्य करता था , पत्नी व बच्चों को भी अपना स्वार्थ पूरा करना था तो उसकी याद आयी , 

ढूंढ़ने लगे , कहि पता नहीं सब दिशाओं को खोजा 

अंत में बादशाह खुद हाथी पर बैठ कर खोजने निकला , बीवी व बच्चे भी खोजने निकले 

जब मिला तो किसी जंगल में आंखे बंद कए भगवान की भगति कर रहा था 

बादशाह ने कहा १० दिन से आप को मैं ढूढ रहा हु , घरवाली व बच्चों ने कहा कि हम भी १० दिन से आप को ढूढ रहे है 

मन से बने सन्यासी ने कहा मैं भी ३० साल से अपनी मन की ख़ुशी व शांति खोज रहा था 

कभी बादशाह की नौकरी में , कभी पत्नी के साथ सम्भोग में, कभी बच्चो के मोह में 

पर मुझे सिर्फ गालिया व दुःख ही मिला, सो मैं अभी १० दिन उस परमात्मा को अपने दिल से याद किया व मुझे परम् शांति व मन के सुख का अहसास हुआ है जो ३० साल में नहीं हुआ था सबसे बड़ा चमत्कार तो यह है 

कि  परमत्मा को याद करने से एक नौकर को ढूढ़ने बादशाह भी मेरे पास चल कर आ गया व मुझे जो गाली देता था व आप कहने लगा क्या यह परमत्मा को याद करने का चमत्कार कम है 

जिस पत्नी व बच्चो का चमचा बनके मैं दिन रात ३० साल घूमता था आज वो मुझे ढूढ रहे है क्या यह परमत्मा को याद करने का चमत्कार कम है 

अगर मैंने ३० साल परमात्मा को याद किया होता जो बादशाहों का बादशाह है , मन की सब कामनाओं को पूर्ण करने वाला सर्वशक्तिमान व सर्वव्यापक है तो आज मेरी स्थिति में कितना सुधार हो जाता, मुझे संसार को त्यागने की भी जरूरत नहीं थी सिर्फ अपने मन को २४ घंटे उसकी याद में बिताना था 

चलो जब जागो तब सवेरा 

आज से मैंने मन से सन्यास ले लिया है व अब मेरा जीवन उस परमात्मा की याद में ही हमेशा गुजरेगा 

यदि आप भी मन के सन्यास का लाभ उठाना चाहते हो तो आज से संकल्प करो के हम ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करेंगे 


ब्रह्मचर्य का ९३वा लाभ - सब बुराइओं को छोड़ना 


दुनिया में यह बहुत ही सत्य बात है, यदि आप एक भी अच्छी आदत को पकड़ लेते हो व उसका गुलाम बन जाते हो तो धीरे धीरे आप की सब बुराई ख़तम होती जाती है | ब्रह्मचर्य दुनिया की सबसे अच्छी आदत , यदि आप इसके गुलाम बन जाते हो तो सब अच्छी आदते आप में आ जाएगी , सब बुराई आप से भाग जाएगी | 

क्योकि जो ब्रह्म का हमेशा ध्यान करता है क्या उसे कभी शराब पिने का ध्यान आएगा , क्या उसे बीड़ी सिगरेट पिने का ध्यान आएगा , क्या उसे कोई नशा करने का ध्यान आएगा | नहीं | क्या उसके पास इतना समय होगा के वह किसी की निन्दा चुगली करे या सुने वो तो हमेशा ही परमात्मा के गुणगान में मस्त रहेगा | 

जब वह हर दुखी में वही भगवान देखेगा तो उसकी सेवा में जीवन बिताएगा | खुदगर्ज बनने की बजाए दान , सेवा व उपकार करने की अच्छी आदते उसमें आ जाएगी 

ब्रह्मचर्य का ९४वा लाभ - अंदर के रहस्य खुलने 

ब्रह्मचर्य के परताप से आप के अंदर के रहस्य खुलने लग जाते है क्योकि आप अंदर आनंद खोजना शुरू कर देते हो जब काम वासना का विचार मन में आता है तो आप कहते हो, रुक जा यही मुझे यह विचार नहीं चाहिए, पर मन का तो कार्य है विचारों को देते रहना 

अब उत्तम विचारों से रहस्य खुलेंगे 

आप को आतम बोध होगा 

नफरत को प्यार से जीता जा सकता है 

शिकायत को कृतज्ञ होने से जीता जा सकता है 

बेइज्जती को आदर से जीता जा सकता है 

औरों की गलतियों को सुधारने के लिए खुद की गलतिया सुधारनी जरुरी है 

दुसरो की तरकी देख कर जलने की बजाए खुद का आत्मविश्वास जगाने से जीत प्राप्त होती है 

दुःख विषय में है सुख परमात्मा के नाम में 

विषय में रहेंगे तो बाद में रोना पड़ेगा , परमत्मा की शरण में रहे तो हमेशा हस्ते रहेंगे 

सुबह सोने की बजाए जागने से सुख मिलता है 

जुठ को सत्य की ताकत से जीत सकते है 

ध्यान एक में लगाने  है व बहुत जगह भटकने से ध्यान भी भटक जाता है 

परमात्मा सबको ज्ञान दे रहा है जो ज्ञान के योग्य है उसे ही समझ में आएगा 

जैसे 

सूरज की रौशनी का आनंद वही उठेगा जिसकी आंखे है जो अँधा है उसके लिए दिन और रात एक 

सूरज है या नहीं एक 

जैसे 

कोयल सुबह मीठे गीत गा रही है उसे ही आनंद आएगा जिसके कान है जो बहरा है उसके लिए 

कोयल गीत गाये या न गाये एक 

जो परमात्मा का ध्यान करेगा उसे वो रहस्य मिलेगा जो उसको नहीं मिल सकता जो उसका ध्यान नहीं करता 

वह आंखे होते हुए भी अँधा बन जाता है , कान होते हुए भी बहरा 

यह रहस्य उसको पता लगेंगे जो ब्रह्मचर्य का पालन करेंगे बाकि की बुद्धि में ताला लगा रहेगा 

ब्रह्मचर्य का ९५वा लाभ - परमात्मा की विशेष दया प्राप्त करना 

ब्रह्मचर्य के पालन करने वाला हमेशा परमात्मा को याद करता है व उससे उसे विशेष परमात्मा की दया प्राप्त होती है क्योकि वो दया का पात्र बन जाता है 

जैसे एक हटा कटा व्यक्ति आप के पास दान मांगने आता है 

क्या उस पर आप दया करोगे, बिलकुल नहीं 

फिर आप के पास एक व्यक्ति एक ऐसे व्यक्ति को लेकर आता है जिसके हाथ भी नहीं व लाते भी नहीं 

क्या उस पर आप दया करोगे, हा   बिलकुल

क्योकि आप सोचते हो कि यह कैसे कमा कर खायेगा , इसके भोजन के लिए जो इसके साथी है उसे धन का दान देना चाहिए 

ऐसे ही वो परमात्मा है जब आप २४ घंटे उसकी का ध्यान रखते हो तो 

आप को खुश रखना, आप के भोजन का प्रंबंध करना , आप को हर मुसीबत से बचा कर रखना, आप को हर बीमारी से बचा कर रखना उसकी जिमेवारी हो जाती है | 

जैसे 

खेत की चार दीवारी करके आप ने पशुओं से तो खेत कोबचा लिया पर 

यह न सोचे के अब परमात्मा की दया की जरूरत नहीं 

बरसात को देने वाला भी परमात्मा है, हल्की सी ज्यादा बरसात या भाड़ आप का खेत पर की सभी मेहनत ख़तम  कर सकती है | 
इस लिए हमेशा उस परमात्मा को याद करे व विषयों का चिंतन मन में न लाये 

काम , क्रोध , लोभ, मोह व अहंकार आप को परमात्मा की दया का पात्र नहीं बनने देगा , इसलिए इनको त्याग कर ब्रह्मचारी बने 

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