ब्रह्मचर्य की 365 दिन की चुनौती - पहला दिन


यदि आप ने मेरी किताब "ब्रह्मचर्य के १०० लाभ" एक बार पड़ी है तो कम से कम २ बार पूरी किताब को पड़े | यदि अभी तक डाउनलोड नहीं की तो पहले डाउनलोड कर ले | अगर इन १०० लाभों को याद कर ले तो और भी अच्छा होगा 

क्योंकि "ब्रह्मचर्य के १०० लाभ" ही वह कारण है जिस की वजह से कोई भी व्यक्ति ब्रह्मचर्य का पालन करने का लक्ष्य बनता है | जैसे कारण के बिना कार्य नहीं हो सकता वैसे ही बिना "ब्रह्मचर्य के १०० लाभ" जाने आप "ब्रह्मचर्य की 365 दिन की चुनौती" तैयार नहीं हो सकते | 

" ब्रह्मचर्य की 365 दिन की चुनौती" आप को हर दिन यह सिखाएगी कि हर दिन ब्रह्मचर्य का पालन कैसे करना है | 365 दिन में आप के 365 तरीकों से रस्ते आपके मन द्वारा या किसी के मन द्वारा रोकें जायेगे | पर हम आप को सिखाएंगे, इसको कैसे पार कर है व कैसे ३६५ दिन ब्रह्मचारी रह कर वो हर तरह के सपने आप ने प्राप्ति करने है जिस में शक्ति, बल, साहस व बुद्धि लगती है |  जिंदगी में कुछ भी प्राप्ति के लिए हर प्राप्त चनौती को स्वीकार करना होता है व उससे मुकाबला करके जितना होता है 

आज ब्रह्मचर्य की ३६५ दिन की चुनौती का पहला दिन है | पहले तो समझे के यह चुनौती दे कौन रहा है | 

यह है आपका अपना मन 

जो बार बार भोग के रस का आदि हो चूका है व आप को बार बार नकरात्मक कर रहा है 

१. नहीं तुम नहीं कर सकते 365 दिन का ब्रह्मचर्य पालन 

२. तुम से ३६५ दिन नहीं होगा ब्रह्मचर्य 

३. तुम ३६५ गन्दी वीडियो देखना बंद नहीं कर सकते 

४. तुम ३६५ दिन हस्तमैथुन करना बंद नहीं कर सकते

५. तुम ३६५ दिन बिना पार्टनर के नहीं रह सकते 

 ६. तुम ३६५ दिन कैसे रह सकते हो 

७. तुम तो अश्लीलता के आदि हो चुके हो 

 ८. तुमने इस से पहले १००० बार कोशिश की व १००० बार तुमने इस गन्दी नाली में दुबे हो, अब तुम को इसका नशा हो गया है | कौन है तुम्हे बचाने वाला , आखिर १००१ नाकाम कोशिश कर रहे हो | कुछ नहीं होगा | 

९.  तुम्हारी हार निश्चित है | क्योकि तुम भोग के गुलाम हो व तुम ब्रह्मचर्य रूपी ब्रह्म योग से मुक्त नहीं हो सकते 

यह तुम्हारा ही मन तुम्हे कमजोर कर रहा है 

जैसे कहा गया है 

विनाश काल्य विपरीत बुद्धि 

जब मनुष्य का विनाश आता है जब मन ही आप को नकरात्मक करे तो इस विनाश में आप की बुद्धि साथ नहीं देगी 

व बुद्धि कुतर्क देकर आप को ३६५ दिन क्या एक दिन भी ब्रह्मचर्य नहीं रहने देगी 

बुद्धि उलटी सलाह देगी 

१. भोग विलास जी जिंदगी से स्ट्रेस कम होता है 

२. दिमाग अच्छा कार्य करेंगे 

३. रात को नीद अच्छी आएगी 

४. जीवन का बस यही उदेश्य है खाओ , पियो व भोग करो 

५. यदि भोग करने से कोई कमजोरी या बीमारी आ जाएगी तो गोली  खा कर व ऑपरेशन कराकर  ठीक हो जाओगे 

६. सारी दुनियां  भोग कर रही है यह भोजन की तरह है छोड़ो ३६५ दिन की चनौती 

ऊपर दिए कुतर्क से मनुष्य की स्थिति एक गीदड़ की तरह हो जाती है 

कहा गया है 

जब गीदड़ की मोत आती है वह शहर की तरफ भागता है | 

तो मेरे प्रिय विद्यार्थी 

अगर ३६५ दिन का ब्रह्मचर्य की चुनौती को पूरा करना है तो न अपने मन की सुनों 

न अपनी बुद्धि की |  क्योकि इस समय दोनों अज्ञानी हो गए है | 


इस समय अपने आप को कल्पना के दुवारा ५ वर्ष के बालक के रूप में बदले 

जब एक बालक पहली बार अपने गुरु के पास सत्य ज्ञान लेने जाता है तो गुरु उसे कहता है 

मेरे विद्यार्थी मैंने तुम्हे अपने ज्ञान के गर्भ में  लिया है अब तुम्हे जब तक भी मेरे गुरुकुल में रहना है ब्रह्मचारी होकर रहना है | तो आओ मेरे ज्ञान को प्राप्त करो 

आज आपकी ब्रह्मचर्य रहने  की  चुनौती की पहला दिन है 

कहते है यदि घड़े में  बून्द बून्द  भी  डालें तो घड़ा भी भर जाता है | आज का दिन या 365 व दिन कोई अलग नहीं होंगे | कोई २५ घंटे या ५० घंटे के नहीं होंगे | आज जैसे ही होंगे | आज के दिन को पूरा जीते हुए ३६५ दिन आज जैसे ही जीने है अखंड ब्रह्मचारी बन के |  

1. सबसे पहले कहे, आज मेरा पहला दिन है 

2. आज मैं पूरा दिन ब्रह्मचारी रहुगा 

3. आज मैं  अपनी नई जिंदगी शुरू कर रहा हु | 

4. अगर आज मैं ब्रह्मचारी होता हु तो अगले दिन ब्रह्मचारी रहना मेरे लिए और भी आसान हो जायेगा | 

5. आज मैं अपने मन को पूरी तरह से नियंत्रित करुगा 

6. आज मै अच्छी चीजें  सीचें सोचुगा 

7. आज में अपना ध्यान अच्छी चीजें करने में लगाऊगा 

8. आज मैं अच्छी चीजें देखूगा 

9. आज मैं अच्छी बातें सुनुँगा 

10. आज मैं अच्छी बातें लिखूंगा 

11. आज मैं अच्छी बातें बोलूंगा 

12. आज मेरे अंदर मेरी आत्मा को जगाने वाले परमात्मा को याद करूँगा 

13. आज मैं अच्छे कर्म जैसे पौधों को पानी देना, पशुओं को भोजन देना व जो भी ज्ञान व जो कुछ भी  पास है उनके साथ बांटूगा जिनके पास नहीं है

14. आज मैं अच्छी बातें पड़ूगाँ  

15. आज मैं इस बात को याद रखूगां के ब्रह्मचर्य से मुझे वीर्य की धन सम्पदा का लाभ प्राप्त होगा 

ब्रह्मचर्य प्रतिष्ठाम वीर्य लाभ:

16. आज मैं इस बात को याद रखूगां कि यदि मैं  वीर्य की धन सम्पदा को मिटी में रोलूँगा तो इस से मैं अपना बुद्धि बल, शारीरक बल व मानसिक बल खो दूंगा | जैसे बिना धन से हम कुछ भी खरीदने के अयोग्य हो जाते है वैसे ही बिना वीर्य से शरीर भी प्राण रहित मुर्दा हो जाता है 

17. आज सिर्फ आज ही ब्रह्मचर्य रहने से कल भी ब्रह्मचर्य होने से व आने वाले हर दिन ब्रह्मचर्य होने से यह मेरे जीवन की सबसे अच्छी आदत बन जाएगी | हर अच्छी आदत सफलता की कुंजी है 

18. आज मैं याद रखुगा कि ब्रह्मचर्य भारत के प्राचीन ऋषियों ने लाखों सालों की तपस्या से खोजा है | जैसे किसी खोज में लाखों प्रयोग किये जाते है | वैसे ही हमारे महान प्राचीन ऋषियों ने वो सभी प्रयोग भी कर के देख लिए है | व उन्हें पता लगा कि सिर्फ ब्रह्मचर्य ही से दुनिया का सबसे बड़ा सुख दे सकता है यह सुख दुनिया के किसी अविष्कार से नहीं प्राप्त हो सकते 

चाहे आप एयर कंडीशन का सुख भोग ले, चाहे ऐरोप्लेन का , चाहे कार का या मोबाइल का हर अविष्कार की हनिया भी है पर सिर्फ ब्रह्मचर्य के लाभ ही है | हानि बिलकुल नहीं | 

व ब्रह्मचर्य से ही मृत्यु को भी जीत सकते है , मौत पर भी नयंत्रण कर सकते है | आज वैज्ञानिकों ने चाँद पर तो कदम रख लिया पर मौत से आज भी डरते है | पर ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला मौत से नहीं डरता 

ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युमपाघ्नत। (अथर्ववेद) 


हनुमान जी के गुरु जी ने हनुमान जी को ब्रह्मचर्य की शिक्षा दी व इसी की शक्ति से प्राणायाम द्वारा हनुमान जी एक पक्षी की तरह उड़ कर २५०० किल्लोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से द्रोणागिरी पर्वत उठा कर  हिमालय से श्री लंका आ गए वो भी सिर्फ २ घंटे में | यह है हमारे ऋषियों की खोज 


भीष्म पितामह के गुरु ने भीष्म पितामह को ब्रह्मचर्य के पालन की शिक्षा दी क्योकि इससे शरीर में इतना बल आ जाता है के मनुष्य बाण लगने पर बाणों को शैया बना कर रहा सकता है व भीष्म पितामह ने यह कठिन चनौती भी स्वीकार की व भीष्म पितामह 58 दिनों तक बाणों की शैया पर रहे लेकिन अपना शरीर नहीं त्यागा क्योंकि वे चाहते थे कि जिस दिन सूर्य उत्तरायण होगा तभी वे अपने प्राणों का त्याग करेंगे।  सूर्य उत्तरायण में पहुंचने में लगभग २ महीने लग गए | यह है हमारे ऋषियों की खोज 


महर्षि दयानंद जी ने २ अश्वों की गाड़ी को अपने ब्रह्मचर्य की शक्ति से  रोका | जब विक्रम सिंह ने ब्रह्मचर्य बल का प्रमाण चाहा तो उसकी दो घोड़े की गाड़ी एक हाथ से पकड़कर रोक दिया यह टस से मस नहीं हुई | अब जाने कितनी शकित होती है एक घोड़े में 

विज्ञानं कहता है एक घोड़े में 765 वाट का करंट होता है व दो घोड़ों में 1500 वाट के करंट की शक्ति 

हम मोटा मोटा हिसाब करे तो एक घोडा  ५  व्यक्तियों को आसानी से खींच

व दो घोड़े १० व्यक्तियों को तो स्वामी जी ने २ घोडा  गाड़ी रोकी तो हमने हिसाब लगाया 

स्वामी दयानन्द जी की शक्ति > दो घोड़ों की शक्ति > १० व्यक्तियों का बल 

स्वामी जी साधारण दाल रोटी खाते थे व हर समय  १० से जायदा व्यक्तियों का बल रहता था | यह है हमारे ऋषियों की खोज 



प्रफेसर राम मूर्ति जी ने हाथी को अपनी छाती पर उठा लिया था एक हाथी का वजन 4000 किलोग्राम होता है | इसका मतलब प्रफेसर राम मूर्ति जी में ब्रह्मचर्य के द्वारा 4000 किलोग्राम उठाने की शक्ति थी | यह है हमारे ऋषियों की खोज | उन्होंने हमारे ऋषि मुनियों की खोजों पर विश्वास किया उनका आदर सत्कार किया व अटल ब्रह्मचर्य का पालन करके अपनी शक्ति को वयायाम में लगाया 

तो आएं अपने भारत की महान प्राचीन ऋषियों की खोज को नत मस्तक करते हुए ३६५ दिन तक अखंड ब्रह्मचारी बनने का संकल्प ले व देखे आप में हनुमान जी जैसे स्पीड, भीषम पिता माह जैसे दर्द को सहन करने की शक्ति व् स्वाम दयानन्द जैसा बल आ जायेगा 

19. आज मैं याद रखूगां कि ब्रह्मचर्य फूलों के सैंट, फलों के जूस व देसी घी की तरह है | क्योकि जैसे हजारों फूल का सिर्फ १० ग्राम सेण्ट बनता है व खुश्बूं से उसके कीमती होने का पता लगता है | फलों की ताकत तो जूस  में है न के जूस निकालने के बाद बचे हु पदार्थ में  | ५ किलो दूध की शक्ति १०० ग्राम निकले देसी घी में होती है | इसी  तरह यदि कोई पुरष  ब्रह्मचर्य से ३६५ के वीर्य को बचचा ले या स्त्री रज बचचा ले तो यह आनत शक्ति होगी जिस से जीवन को किसी भी चनौती का सामना कर के उसे जीता जा सकता है | 

20. आज मैं याद अपने गुरु की बात को हमेशा के लिए याद  रखूगां कि यदि ब्रह्मचर्य को मैंने अपने जीवन का मार्ग दर्शक बना लिया तो यह मुझे जीवन की हर मुश्किल से बचा देगा जैसे किश्ती से हम एक तो अपने लक्ष्य पर पहुंच जाते है व दूसरा पानी जितना मर्जी गहरा हो हम डूबते नहीं | यदि ब्रह्मचर्य मुझे हर समय परमात्मा को याद करने की शक्ति देता है व जो गुरुओं का भी गुरु है सिर्फ मुझे उसके चरणों में हमेशा रहना है | बाकी उसके बिना तो पता भी नहीं हिलता

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