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स्वामी दयानंद प्राकृतिक चिकित्सालय  में आपका स्वागत है

इस चिकित्सालय  के संस्थापक डॉ. विनोद कुमार ने रोगियों की सहायता के लिए 500+ बिमारियों की चिकित्सा सबंधी ज्ञान दिया | 

अपना सीखना शुरू करें


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ब्रह्मचर्य के १०० लाभ - भाग १३

 

"ब्रह्मचर्य के १०० लाभ" के भाग 13  में आप का स्वागत है। पहला  भाग १भाग २, भाग ३, भाग ४भाग ५ , भाग 6 और भाग 7  va  भाग 8  भाग ९ व भाग १० व  भाग ११   व भाग १२  पढ़ें। 

६१वा ब्रह्मचर्य का लाभ : चरित्र का सुधार होना 

यदि आप अपने चरित्र का सुधार करना चाहते हो तो ब्रह्मचर्य का पालन बहुत जरुरी है | चरित्र आप के चाल चलन से बनता है अच्छे चरित्र वाले व्यक्ति को चरित्रवान व्यक्ति कहा जाता है व गंदे चरित्र वाले व्यक्ति को चरित्रहीन व्यक्ति कहा जाता है अब आप ही बताये आप चरित्रवान कहलाना चाहोगे या चरित्रहीन | अश्लील फिल्मे देखना, अश्लील  सुनना, अश्लील बातें करना , अश्लील लोगो से मेलजोल रखना, अश्लील किताबें पड़ना यह सब आप को चरित्रहीन बना के नरक में फांकता है, व इसी जनम में आप को खलनायक या राक्षस की उपाधि देगा | क्या आप यह पसंद करोगे या देश भगति  देखकर, धार्मिक बातें सुन कर , धार्मिक लोगो से मेलजोल रख कर व धार्मिक किताबें पड़ कर आप चरित्रवान व्यक्ति बनना चाहोगे | 

भारत को गर्व है इसके इतिहास में ब्रह्मचर्य का पालन करके करोड़ो लोग चरित्रवान बने 

श्री राम चंद्र चरित्रवान तथा ब्रह्मचारी थे उनके हाथों में इतना बल था के एक हाथ से ही गांडीव तोड़ दिया 


श्री लक्ष्मण जी  चरित्रवान तथा ब्रह्मचारी थे उन्होंने अपनी भाभी सीता जी को माँ का दर्जा दिया व १४ वर्ष बनवास में उनके पैरों को ही देखा व उनके ब्रह्मचर्य में इतना बल था के उन्होंने इन्द्रजीत का वध कर दिया क्योकि 

अगस्त्यमुनि ने कहा था के इन्द्रजीत को ब्रह्मा का वरदान है व्ही उसका वध कर सकता है जिसने १२ वर्ष तक ब्रह्मचर्य का पालन किया हो मेघनाथ का नाम इस लिए इंद्रजीत पड़ा क्योकि उसने इंद्र को हराया था व लक्ष्मण इंद्रजीत से भी बड़ा इन्द्रियजीत था जिस ने अपने सभी इन्द्रियों को १२ वर्ष तक ब्रह्मचर्य के बल से जीता था 

यदि आप भी अपनी इन्द्रियों को ब्रह्मचर्य के माद्यम से जित लेते हो तो आप भी हर जिंदगी की युद्ध में विजय ही होंगे | आओ ब्रह्मचर्य अपना कर सदा के लिए सदाचारी बने 

६२वा ब्रह्मचर्य का लाभ : समय का सदुपयोग 

ब्रह्मचर्य से आप समय का सदुपयोग कर सकते हो | जब मन कामुक हो जाता है तो यह मन की तृष्णा कभी नहीं ख़तम होती व इस से आप का कीमती समय व्यर्थ चला जाता है एक बार गया समय लोट कर नहीं आता | यदि इस समय आप अच्छे कामों में बिताते है तो यह सब से ज्यादा समय का सदुपयोग है | जो समय आप गलत विचारों को सोच कर ख़राब करते हो व्ही समय  एक पका ब्रह्मचारी अपने विद्या अध्ययन व अपने कार्य में लगा कर सफलता प्राप्त करता है पर मूर्ख वासना  भोगी को यह बात समझ में नहीं आती 

यदि आप ने अपना विद्यार्थी जीवन का सदुपयोग नहीं किया तो बाद में यही आप की सबसे बड़ी गलती होगी जिसे आप अपनी कलम से लिखोगे के मैंने समय गलत चीजों  में बर्बाद किया जिसकी वजह से विद्यार्थी काल में मैं पड़ नहीं सका तो यह लिखने की बजाए इतिहास बनाये आज से ही ब्रह्मचर्य का सख्ती से पालन करके अपने जीवन के समय का सदुपयोग करे | 

६३वा ब्रह्मचर्य का लाभ : हर तरह की सफलता का राज 

जिंदगी में सफलता के मुख्य रस्ते यह से होकर गुजरते है 

१. आप की एकाग्रता 

२. आप का बड़ा लक्ष्य होना 

३. आत्मविश्वास 

४. हर न मानने वाली सोच 

५. बचत करने की आदत 

६. कल्पना शक्ति 

७. खुद पर नियंत्रण 

८. नेतृत्व करने की योग्यता 

९. मन में उत्साह 

१०. आकर्षक चरित्र 

११. सकरात्मक सोच 

१२. सहनशक्ति 

१३. सहयोग की भावना 

अब आप मुझे बताये यदि आप ब्रह्मचर्य का पालन करेंगे तो क्या यह चीजे आप को नहीं मिलेगी | बिलकुल मिलेगी | जब यह चीजे ही मिल जाएगी तो आप को किसी भी क्षेत्र में आप की सफलता को कोई रोक नहीं सकता 

क्योकि 

  ब्रह्मचर्य से आपको 

 एकाग्रता  मिलती है 

कल्पना शक्ति मिलती है 

खुद पर नियंत्रण होता है 

नेतृत्व करने की योग्यता मिलती है 

मन में उत्साह पैदा होता है 

 आकर्षक चरित्र बनता है 

सकरात्मक सोच मिलती है 

सहनशक्ति मिलती है 

सहयोग की भावना पैदा होती है 

यदि आप का उदेश्य पैसा कमाना है व आमिर बनना है तो भी ब्रह्मचर्य का पालन इस सफलता को प्राप्त करने के लिए जरुरी है | 

 क्योकि बिना पुरषार्थ के धन नहीं मिलता , लक्ष्मी पुरषार्थ के वश में सदा रहती है |  क्योकि जो वीर्य का हमेशा नाश करता रहता है वह पुरषार्थ भी नहीं कर सकता व उनमें धन की रक्षा का पुरषार्थ भी नहीं होता जिस कारण लक्ष्मी की रक्षा नहीं होती तथा लक्ष्मी किसी और पुरषार्थी के पास चली जाती है | तथा आप को सफलता प्राप्त नहीं होती 

६४वा ब्रह्मचर्य का लाभ : खानपान व सोने की अच्छी आदते बनना 

ब्रह्मचर्य से आप की खानपान  की अच्छी आदते बन जाती है 

क्योकि यदि आप ब्रह्मचर्य के व्रत का पालन कर  रहे हो तो फिर भी आप को स्वपनदोष हो रहा है व वीर्य क्षय हो रहा है तो आप बहुत ज्यादा  जागरूक हो जाते हो के क्या खाना है क्या नहीं 

आप जल्दी से इन्हे खाना बंद कर के अच्छी आदत बनाते हो खान पान की 

१. खटी चीजे न खाना जिस में खट्टी दही भी शामिल है 

२.  लाल मिर्च व ज्यादा मसाले न खाना 

३. सलाद व ह्री सब्जिया ज्यादा खाना 

४. नमक बहुत कम  वो भी काला या सेंधा  नमक खाया जाता है 

५ तामसिक भोजन का बिलकुल त्याग करते है 

इसी तरह आप रात को जल्दी सोते हो व सुबह जल्दी उठते हो | 

६५वा ब्रह्मचर्य का लाभ :  मन द्वारा सकरात्मक विचार सोचना 

जो व्यभिचारी व्यक्ति होते है उनकी सोच भी बहुत ही नकरात्मक हो जाती है क्योकि वीर्यनाश से उनकी बुद्धि का भी नाश हो जाता है व हर बात पर अपना नकरात्मक नजरिया  बता कर नकरात्मक माहौल पैदा करते है व दूसरों पर भी नकरात्मक प्रभाव डालते है व आप भी असफल होते है व दूसरों को भी असफल बनाने वाले कांटे बनते है | 

जो ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले व्यक्ति होते है उनकी सोच भी बहुत ही सकरात्मक हो जाती है क्योकि वीर्यनाश कभी नहीं होता व इससे उनकी बुद्धि का हमेशा ही विकास होता  है व हर बात पर अपना सकरात्मक नजरिया  बता कर सकरात्मक माहौल पैदा करते है व दूसरों पर भी सकरात्मक  प्रभाव डालते है व आप भी सफल होते है व दूसरों को भी सफल बनाने वाले आधार बनते है | 

देखिए कितनी सकरात्मक सोच यही भीषम पितामह की जो उन्होंने ब्रह्मचर्य के विषय में कहा 


ब्रह्मचारी की जब ब्रह्मचर्य के पालन से बुद्धि ही सकरात्मक हो जाती है तो उसे हर चीज मिल जाती है


फिर बिषम पितामह सकरात्मक सोच से ब्रह्मचर्य को महत्व देते हुए बोलते है 

के ब्रह्मचर्य का पालन ही सत्य का पालन करना है 




 देखे प्राचीन  भारतियों की सोच वीर्य रक्षा से ऋषिमुनियों के नाम बनाये 

वीर्य का  एक नाम शुक्र भी है क्योकि वीर्य में जीवित शुक्राणु होती है जो वीर्य रक्षा का उपदेश दे उस ऋषि का नाम है 

शुक्राचार्य 

ब्रह्मचर्य के तीन रूप होते है 

शारीरक ब्रह्मचर्य 

मानसिक ब्रह्मचर्य 

वाचिक ब्रह्मचर्य 

जो शारीरक मैथुनो के साथ मानसिक मैथुनो का भी त्याग करता है वह असली ब्रह्मचारी है व उसकी सोच में सकरात्मकता की सिद्धि आ जाती है | क्योकि ब्रह्मचर्य सबसे बड़ा तप है व इसका फल सबको मिलता है इसको नष्ट करने से आप के द्वारा किये सभी तपों का फल नष्ट हो जाता है | 

सकरात्मक विचार सोचने के लिए आप में मेधा बल होना चाहिए यह मस्तिक्ष का मेधा बल भी ब्रह्मचर्य के पालन से आता है 

क्योकि कहा गया है 

वीर्य बलम , बलम वीर्य 

इसका मतलब वीर्य ही बल है व बल ही वीर्य है 

जिस में यह बल आता है उसमें मेधा शक्ति बढ़ जाती है तथा वह व्यक्ति मेधावी हो जाता है 

Name

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स्वामी दयानंद प्राकृतिक चिकित्सालय: ब्रह्मचर्य के १०० लाभ - भाग १३
ब्रह्मचर्य के १०० लाभ - भाग १३
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