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स्वामी दयानंद प्राकृतिक चिकित्सालय  में आपका स्वागत है

इस चिकित्सालय  के संस्थापक डॉ. विनोद कुमार ने रोगियों की सहायता के लिए 500+ बिमारियों की चिकित्सा सबंधी ज्ञान दिया | 

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ब्रह्मचर्य के १०० लाभ" का भाग 20


 "ब्रह्मचर्य के १०० लाभ" के भाग 20   में आप का स्वागत है।  भाग १भाग २, भाग ३, भाग ४भाग ५ , भाग 6 और भाग 7  va  भाग 8  भाग ९ व भाग १० व  भाग ११  भाग १२     भाग 13  ,   भाग 14   व भाग 15  व भाग 16   व भाग 17  भाग 18  व भाग 19 पढ़ें।

ब्रह्मचर्य का ९६वा लाभ - मन के लालच से बचना 

जब मनुष्य ब्रह्मचर्य का पालन करता है तो इसका एक लाभ यह होता है इससे सदा के लिए मन का लालच ख़तम हो जाता है क्योकि ब्रह्मचर्य में हम ब्रह्म का ध्यान करते है हमेशा | व जब ध्यान करते है तो हमे याद आता है के परत्मात्मा ने सबकुछ दिया है हमारे जीवन में परत्मात्मा ने किसी चीज की कमी नहीं रखी |  

१. खाने के लिए २४ घंटे भोजन ही पैदा कर रहा है  किसी भी खेत में जाओ परमात्मा अनाज को पैदा कर रहा है किसी भी बगीचे में जाओ परमात्मा हमारे लिए फल पैदा कर रहा है कोई उसका मूल्य परमात्मा हम से नहीं मांगता, 

२. हर रोज सूरज की रौशनी देता है | 

३. वृक्षों के पते हिला कर हर समय ऐसी से भी ठंडी हवा दे रहा है 

४. सोने के लिए रात व धरती माता भी पैदा की जिस की गोद में हम सो सकते है 

५. चलने के लिए पैर दिए 

६. प्यास लगे तो जल भी दिया 

७. शरीर में बल, शक्ति बुद्धि बढ़ाने के लिए वीर्य भी पैदा किया है उस परमात्मा ने 

८. कपड़े के लिए कपास  भी पैदा कर रहा है परमात्मा 

९. कार्य करने के लिए हाथ भी दिए है जैसे मैं हाथों से यह लिख रहा हु पर यह हाथ उसी के दिए है 

१०. देखने के के लिए ऑंखें भी दी , सुनने के लिए कान भी दिए , सोचने के लिए मन व बुद्धि भी दी 

मैं यहां सिर्फ लिखता जाऊंगा मेरी जिंदगी  ख़तम हो जाएगी पर परमात्मा के दिए मुफ्त के वरदान ख़तम नहीं होंगे जब मनुष्य को यह चीजे पता लगती है तो वह सोचना बंद कर देता है के मेरे पास किसी चीज की कमी भी है | 

जब चीज की कमी ही नहीं महसूस करता तो लालच भी नहीं मन में आ सकता | मन में किसी को धोखा दे कर लूटने का विचार भी मन में नहीं आ सकता | लालची तो वो होगा जिसके मन में अपनी वासना को पूरा करने की लालच होगा व उसके लिए वह छल , कपट व धोखे का सहारा ले कर धन एकठा करेगा | जब मन में वासना का स्थान ही नहीं वो उस परमात्मा ने ले लिया तो लालचवहां रह ही नहीं सकती | उल्टा वो तो सोचेगा भगवान ने मुझे ज्यादा दिया है इस लिए इसे उनको बांटे जिनको इसकी जरूरत है | 

ब्रह्मचर्य का ९७वा लाभ - भगवान के दिए वरदानो के लिए कर्तज्ञ होना 

कृतज्ञ होने से मनुष्य हमेशा प्रसन रहता है व उसकी टेंशन एक मिनट में शु मन्त्र हो जाती है | ब्रह्मचर्य के पालन करने से हमे यह कृतज्ञ होने का अच्छा गुण प्राप्त होता है क्योकि जब ब्रह्मचारी को पता लगता है के परमात्मा बिना कोई कीमत लिए अनंत चीजे उसको दे रहा होता है तो उसका दिल करता है के वह उस परमात्मा के नत मस्तक हो जाये व लाख लाख बार धन्यवाद करे | वह रोज परमात्मा का धन्यवाद करना शुरू कर देता है | वह सुबह भी लाख लाख बार परमात्मा का धन्यवाद करता है व दोपहर  को भी , व रात को भी | इस तरह उसकी पूरी जिंदगी कर्तज्ञ होने में बीत जाती है व इससे उसे खुशियों का सागर मिलता है , खुशियों  के मोती मिलते है जो 

अमूल्य है 

विषय वासना हमे स्वार्थी बनाती है | इस में हम ऐसे दुकानदार बनते है जो ४२० है 

मान लीजिए, हम ने उसके ऊपर विश्वास करके २००० रुपये सामान खरीदने से पहले ही दे दिए | १ घंटा हमे समान की खोज में लगा | बाद में फिर हम से वो २००० मांगने लग जाये व यह स्वीकार ही नहीं करे के हम ने उसे पैसे दिए 

कैसा लगेगा आप को वो दुकानदार , एक धोकेबाज, एक चरित्रहीन व्यक्ति जो आप के विश्वास के उपकार को नहीं मानता | 

क्या यह सच नहीं जो परमात्मा ने अनत उपकार हम पर किये है वो मानते भी नहीं व उसका धन्यवाद के लिए कुछ पल शांत भी नहीं होते बल्कि अशांत मन से हमेशा और और वासना चाहिए को चिकते हुए दुःख का कष्ट उठाते है 

तो आओ परमात्मा के उपकारों को याद करके उसका धन्यवादी बनने के लिए आज से ही ब्रह्मचर्य के व्रत का पालन शुरू करे 


ब्रह्मचर्य का ९८वा लाभ - परमात्मा के दिए वरदानो को गिनने की शक्ति आना 

परमात्मा हर रोज हमे बड़े बड़े वरदान दे रहा है पर हमारा ध्यान तो विषय की पूर्ति में लगा हुआ है व वो हमे दिखाई नहीं देते पर जो ब्रह्मचर्य का पालन करते है उनको यह वरदान दिखाई देने लग जाते है व वे उनको हर रोज गिनते है व वरदानों को अपने पास रखते हुए अपनी शक्ति बड़ा लेते है | 

परमात्मा भी उसी को और ज्यादा ज्यादा वरदान देने लग जाता है जो ब्रह्मचर्य के तप में हमेशा उसकी तपसिया करते है |  इस तपस्या में ब्रह्मचारी हमेशा ही परमात्मा के गुण गाता है व उनके गुणों की प्रशंसा करता है परमात्मा उसे बादशाओं का बादशाह बना देता है |  


ब्रह्मचर्य का ९९वा लाभ - मन की तृष्णा ख़तम होना 


ब्रह्मचर्य के पालन करने से आप की सारी तृष्णाएं मिट जाती है | तृष्णा का मतलब होता है लालसा | जब आप अपनी प्यास सांसारिक वासनाओं से मिटाने की कोशिश करते हो तो यह कम नहीं होती और बढ़ती जाती है 

आप ने वासना की पूर्ति  के लिए एक बार वीर्य नाश करना शुरू कर दिया फिर बार बार मन उसी वासना की तरफ जायगा क्योकि यह वासना की आग है व अपने वीर्य रूपी तेल से इसे जितना भुझाने की कोशिश करो , आग बढ़ेगी , इसे तो परमात्मा के ध्यान रूपी जल से बुझाना चाहिए यह ऐसा जल है जो कभी ख़तम ही नहीं होता चाहे एक लाख बार उसका नाम लो , हा पर इस जल से आप की मन की विषयों की तृष्णा की प्यास ख़तम हो जाएगी | 

१. भूखे रहने से यह विषय की तृष्णा नहीं मिटनी क्योकि फिर भोजन की तृष्णा  उठेगी 
२. आज कल लोग हकीमों के पास भागते है के कोई जड़ी बूटी मिल जाये ताकि शक्ति आये वासना की पूर्ति के लिए , पर यह वासनाये तृष्णाएं के रूप में है , जिसकी लालसा में आदमी भूढा हो जाता है पर यह वासना नहीं जाती , सब जड़ी बुटिया फेल  है , सिर्फ ब्रह्मचर्य ही इस तृष्णा को मिटने की बूटी है जिसमें हम परमात्मा  को हर दम याद करते है | 
३. इन वासना की पूर्ति में ही वीर्य रूपी धन ख़तम हो जाता है व उसके बाद हम मोहताज है क्योकि दुर्बल से पुरषार्थ नहीं होता व धन भी नहीं कमा सकता  पर आप जब उस परमात्मा को याद करते हो हमेशा तो आप में वीर्य व पुरषार्थ हमेशा रहेगा व जिस से आप को किसी का मोहताज नहीं होना पड़ेगा | 

ब्रह्मचर्य का १००वा लाभ - परमात्मा की प्रार्थना करने का लाभ प्राप्त होना 

ब्रह्मचर्य में मन को विषयों से हटा कर परमात्मा की प्रार्थना में समय गुजरा जाता है व हम परत्मात्मा की प्रार्थना करते हुए कहते है 
हे सभी वस्तुओं के रचयता परमपिता परमात्मा जैसे आप ने शेर व चील को अपने लक्ष्य का शिकार करना सिखाया वैसे ही मुझे ब्रह्मचर्य के तप के लक्ष्य को प्राप्त करना सिखाये 
आप प्यार का सागर हो व मेरे जीवन में से सभी वासना को निकल कर मेरे जीवन को प्यार से भर दो 

इस तरह प्रार्थना करते रहने से आप को निम्न परमात्मा की प्रार्थना करने के लाभ मिलेगी | 

१. प्रार्थना करने से हमे परमात्मा से वासना के हुए हमले से बचाव प्राप्त होता है आप के मन में जब भी वासना के विचार आये उसी वक्त परमात्मा की प्रार्थना   शुरू कर दे , हे प्रभु मुझे बचाओं मुझे बचाओं इस वासना के दैत्यों से 

परमात्मा  इन काम, क्रोध व लोभ के दैत्यों का वध करके उसी समय आप की रक्षा करेंगे | 

२. परमात्मा के प्रार्थना से आप के सभी नकरात्मक विचार ख़तम हो जाते   है 

३. परमात्मा की प्रार्थना में हम परमात्मा के उपकारों को याद करते है व हमारे जीवन में खुशियों की संख्या बढ़ जाती है 

४. यह परमात्मा के आगे निम्रता से झुकना होता है व इससे हमारा जीवन निम्रता से भर जाता है 

५. परमात्मा ही सिर्फ पूर्ण सत्य है व उसकी प्रार्थना से उस सत्य के साथ जुड़ कर हम भी सत्य का रूप हो जाते है | 

६. परमात्मा इस दुनिया की महान शक्ति है व उसकी प्रार्थना से उस शक्ति के साथ जुड़ कर हम भी शक्ति का रूप हो जाते है | 

७. मैने यह अनुभव किया है कि जब हम सारी आशा छोडकर बैठ जाते हैं, हमारे दोनो हाथ टिक जाते हैं, तब कहीं न कहीं से मदद आ पहुंचती है। यही है प्रार्थना का चमत्कार 

ब्रह्मचर्य के लाभ तो अनंत है क्योकि इसमें सिर्फ परमात्मा को याद किया जाता है व परमात्मा के गुण गाये जाते है परमात्मा के किये उपकारों का धन्यवाद दिया जाता है परमात्मा के गुण अनंत है, परमात्मा के उपकार अनंत है इस लिए परमात्मा की राह पर चलने के के लाभ भी अनंत है, उसकी कोई गिनती नहीं कर सकता पर फिर भी यदि आप के जीवन में संकट की घडी आये तो इन १०० लाभों को याद कर लेना ताकि आप अपने अमूल्य वीर्य बचा सके, व अपना ध्यान काम वासना व सभी विषयों से हटा सके व परमात्मा का ध्यान लगा सके व अच्छी व धार्मिक किताबों को पड़ कर ब्रह्मज्ञान प्राप्त करके अपना जीवन सफल कर सके | ओम शांति , शांति शांति ओम 

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स्वामी दयानंद प्राकृतिक चिकित्सालय: ब्रह्मचर्य के १०० लाभ" का भाग 20
ब्रह्मचर्य के १०० लाभ" का भाग 20
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